नई दिल्ली: आप भी विदेश घूमना चाहते हैं और आपके पास पैसे की कमी है. आप हर समय अपने परिवार के लोगों से यह बहाना बनाते हैं कि अगले साल जब सैलरी बढ़ेगी तब एक पैकेज बुक कराएंगे. फिर आप उन्हें लालच देते हैं कि त्योहारी सीजन में जब पैकेज सस्ते हो जाएंगे तब विदेश यात्रा का प्रोग्राम बनाएंगे. शेयर बाजार में ट्रेड करने वाले दिन भर शेयरों की कीमत का चार्ट देख कर बोर हो जाते हैं, तब वह ब्रेक लेते हैं और उसके बाद हॉलीडे पर चले जाते हैं.

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हर रोज बन रहा है गिरने का रिकॉर्ड, कहां तक गिरेगा रुपया और क्या होगा असर?

रुपये ने सबसे पहले इस साल जुलाई महीने में पहली बार 80 के स्तर से नीचे को छुआ था. हालांकि तब कारोबार के दौरान रिजर्व बैंक के दखल के बाद रुपया वापसी करने में सफल रहा था. इसके बाद अगस्त में ऐसा पहली बार हुआ था, जब रुपया 80 के स्तर से नीचे बंद हुआ था. आज के कारोबार में रुपये ने पहली बार 81 के स्तर को पार किया है.

रुपये ने बनाया गिरने का रिकॉर्ड (Photo: Reuters)

सुभाष कुमार सुमन

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2022,
  • (अपडेटेड 23 सितंबर 2022, 11:07 AM IST)

अमेरिका में ब्याज दरें लगातार बढ़ (US Rate Hike) रही हैं. इस सप्ताह अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने लगातार तीसरी बार ब्याज दर में 0.75 फीसदी की भारी-भरकम बढ़ोतरी की. दरें कारण क्यों सबसे नई विदेशी मुद्रा Traders असफल बढ़ने की रफ्तार में सुस्ती नहीं आने का संकेत मिलने से दुनिया भर की करेंसीज डॉलर के मुकाबले तेजी से गिर रही हैं. फेडरल रिजर्व का संकेत मिलने के बाद इन्वेस्टर्स दुनिया भर के बाजरों से पैसे निकाल रहे हैं और सुरक्षा के लिहाज से अमेरिकी डॉलर में अपना इन्वेस्टमेंट झोंक रहे हैं. इस कारण भारतीय मुद्रा 'रुपया (INR)' समेत तमाम अन्य करेंसीज के लिए ये सबसे खराब दौर चल रहा है. रुपये की बात करें तो इसकी वैल्यू (Indian Rupee Value) पिछले कुछ समय के दौरान बड़ी तेजी से कम हुई है. रुपया लगातार एक के बाद एक नए निचले स्तर (Rupee All Time Low) पर पहुंचता जा रहा है. आज शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने गिरने का नया रिकॉर्ड बना दिया और नए सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया.

पहली बार 81 के भी पार हुआ रुपया

रुपये ने सबसे पहले इस साल जुलाई महीने में पहली बार 80 के स्तर से नीचे को छुआ था. हालांकि तब कारोबार के दौरान रिजर्व बैंक के दखल के बाद रुपया वापसी करने में सफल रहा था. इसके बाद अगस्त में ऐसा पहली बार हुआ था, जब रुपया 80 के स्तर से नीचे बंद हुआ था. आज के कारण क्यों सबसे नई विदेशी मुद्रा Traders असफल कारोबार में रुपये ने पहली बार 81 के स्तर को पार किया है. आज शुरुआती कारोबार में रुपया 39 पैसे गिरकर डॉलर के मुकाबले 81.18 पर आ गया. इससे पहले गुरुवार को भी रुपये ने नया ऑल टाइम लो बनाया था. जिस रफ्तार से रुपये में गिरावट आ रही है, कई इकोनॉमिस्ट मान रहे हैं कि यह डॉलर के मुकाबले 82 के स्तर को भी जल्दी ही पार कर सकता है.

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इस तरह गिरी रुपये की वैल्यू

आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल अब तक रुपया 7 फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुका है. रुपये की वैल्यू अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कम होती गई है. अभी प्रमुख मुद्राओं के बास्केट कारण क्यों सबसे नई विदेशी मुद्रा Traders असफल में डॉलर के लगातार मजबूत होने से भी रुपये की स्थिति कमजोर हुई है. करीब दो दशक बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो की वैल्यू कम हुई है, जबकि यूरो (Euro) लगातार अमेरिकी डॉलर से ऊपर रहता आया है. भारतीय रुपये की बात करें तो दिसंबर 2014 से अब तक यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 25 फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुका है. रुपया साल भर पहले अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 74.54 के स्तर पर था.

इन कारणों से बढ़ रहा डॉलर का भाव

दरअसल बदलते हालात ने पूरी दुनिया के ऊपर मंदी का जोखिम खड़ा कर दिया है. अमेरिका में महंगाई (US Inflation) 41 सालों के उच्च स्तर पर है. इसे काबू करने के लिए फेडरल रिजर्व (Federal Reserve Rate Hike) तेजी से ब्याज दरें बढ़ा रहा है. हालांकि इसके बाद भी महंगाई काबू में नहीं आ रही है. अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का फायदा अमेरिकी डॉलर को मिल रहा है. अमेरिका आधिकारिक रूप से मंदी की चपेट में आ चुका है और ब्रिटेन समेत कई अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं गिरने के मुहाने पर हैं. मंदी (Recession) के डर से विदेशी निवेशक कारण क्यों सबसे नई विदेशी मुद्रा Traders असफल उभरते बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं और सुरक्षित इन्वेस्टमेंट के तौर पर डॉलर खरीद रहे कारण क्यों सबसे नई विदेशी मुद्रा Traders असफल कारण क्यों सबसे नई विदेशी मुद्रा Traders असफल हैं. इस परिघटना ने अमेरिकी डॉलर को अप्रत्याशित तरीके से मजबूत किया है. इसी कारण कई दशक बाद पहली बार अमेरिकी डॉलर की वैल्यू यूरो (Euro) से भी ज्यादा हो गई है, जबकि यूरो अमेरिकी डॉलर से महंगी करेंसी हुआ करती थी. अभी अमेरिकी डॉलर करीब दो दशक के सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच चुका है.

कमजोर रुपये का आप पर क्या असर?

किसी भी देश की करेंसी के कमजोर होने के कई इफेक्ट होते हैं. इसे उदाहरणों से समझते हैं कि कमजोर होते रुपये से आपके ऊपर क्या असर होने वाला है? अगर आपका कोई बच्चा किसी अन्य देश में पढ़ाई कर रहा है और आप उसे भारत से पैसे भेज रहे हैं, ऐसी स्थिति में आपको नुकसान होने वाला है. चूंकि अमेरिकी डॉलर को ग्लोबल करेंसी का दर्जा प्राप्त है और यह लगातार मजबूत हो रहा है, ऐसे में आप जो रुपये में भेजेंगे, वह डॉलर में कंवर्ट होने पर कम वैल्यू का रह जाएगा. इस कारण आपको अब पहले की तुलना में अधिक रुपये भेजने होंगे. वहीं अगर आपका कोई परिजन या रिश्तेदार किसी अन्य देश से आपको पैसे भेजता है, तो आपको फायदा होने वाला है. भेजी गई वही पुरानी रकम में अब आपको अब ज्यादा रुपये मिलेंगे. अगर आप कारोबार करते हैं तो असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका बिजनेस इम्पोर्ट बेस्ड है या एक्सपोर्ट बेस्ड. एक्सपोर्ट करने वालों को कमजोर रुपये से फायदा होने वाला है, जबकि इम्पोर्ट करने वालों को अब पुरानी मात्रा में ही माल मंगाने के लिए ज्यादा रुपये भरने होंगे.

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एक ट्रेड में प्रॉफिट से उन्होंने अपने यूरोप ट्रिप का खर्चा निकाल लिया. माहेश्वरी सेवी में रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर है और फुल टाइम ट्रेडर हैं.

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गुड़गांव के चार्टर्ड अकाउंटेंट पीयूष कुमार कारण क्यों सबसे नई विदेशी मुद्रा Traders असफल माहेश्वरी ऐसे नहीं है. 6 साल पहले उन्होंने जॉब छोड़ दी और सिर्फ 6 सालों में उन्होंने शेयर में निवेश कर 100 गुना तक रिटर्न कमाया है. वह ट्रेड करते हैं और उसी वक्त वे विदेश घूमने चले जाते हैं. 31 साल के पीयूष कुमार माहेश्वरी हर तिमाही लंबे विदेश टूर पर जाते हैं.

पीयूष कुमार माहेश्वरी शेयर बाजार में ट्रेड करते हैं. वह दिनभर शेयरों की ट्रेडिंग करते हैं और शाम को थाईलैंड या यूरोप के किसी बीच पर मजे ले रहे होते हैं. इस साल जून में वे पेरिस में थे. इसके इसके बाद उन्होंने टाइटन में स्विंग ट्रेड किया. इनका होल्डिंग पीरियड 10 दिन का था. इसके बाद उन्होंने 15 फ़ीसदी मूवमेंट को कैप्चर कर लिया. इस ट्रेड में प्रॉफिट से उन्होंने अपने यूरोप ट्रिप का खर्चा निकाल लिया. माहेश्वरी सेवी में रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर है और फुल टाइम ट्रेडर हैं.

बिहार के एक छोटे से शहर में पैदा हुए पीयूष माहेश्वरी दसवीं कक्षा तक हिंदी मीडियम से पढ़े लिखे हैं. वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन करने के लिए श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में एडमिशन लेने में सफल रहे. इसके बाद उन्होंने डेलोइट की ऑडिट टीम के लिए 3 साल तक काम किया और चार्टर्ड कारण क्यों सबसे नई विदेशी मुद्रा Traders असफल अकाउंटेंसी का कोर्स करते रहे.

इसके बाद उन्होंने ओयो के लिए 1 साल काम किया. अपनी पढ़ाई के दिनों में उन्होंने अपने पिता और दादा जी को कमोडिटी ट्रेडिंग करते हुए देखा था. इस वजह से ट्रेडिंग उनके खून में था. पीयूष माहेश्वरी के परिवार के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के कुछ शेयर थे. वह अखबार के जरिए अपने पोर्टफोलियो की वैल्यू चेक करते रहते थे. इस वजह से शेयरों में ट्रेडिंग में उनका इंटरेस्ट कॉलेज के समय में भी था.

पीयूष शेयर मार्केट में काफी दिलचस्पी लेकर ट्रेडिंग करते थे. साल 2016 में कॉरपोरेट जॉब छोड़ दी. उसने फुल टाइम ट्रेडिंग करने का फैसला किया. उन्होंने अपने परिवार को 1 साल का समय मांगा और यह कहा कि वह अगर 1 साल में कमाई नहीं कर पाए तो वापस कॉरपोरेट जॉब में लौट जाएंगे, लेकिन इसकी जरूरत नहीं पड़ी. उन्होंने 6 साल में अपनी संपत्ति 100 गुना बढ़ा ली है.

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