Diabetes care: कितना घातक है ब्लड शुगर का 400 के पार जाना? डॉक्टर से जानें इस स्थिति का कैसे करें सामना

डॉ पारस अग्रवाल कहते हैं कि सबसे पहले तो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने ही न दें. इसके लिए नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करें.

डॉ पारस अग्रवाल कहते हैं कि सबसे पहले तो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने ही न दें. इसके लिए नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करें.

Diabetes cross 400 mg/dl: डायबिटीज को आमतौर पर शुगर की बीमारी के नाम से जाना जाता है. डायबिटीज की बीमारी में खून में शु . अधिक पढ़ें

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  • Last Updated : November 22, 2022, 19:21 IST

हाइलाइट्स

जब ब्लड शुगर लेवल 300 या 400 mg/dl हो जाए तो बहुत ज्यादा प्यास लगती है.
ब्लड शुगर 300 से ज्यादा होने पर खून में एसिड यानी कीटोन का निर्माण बढ़ने लगता है.

If blood sugar croos 400mg/dl: पूरी दुनिया में डायबिटीज की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी गिरफ्त में लेने लगी है. टाइप 2 डायबिटीज के लिए आमतौर पर गतिहीन जीवनशैली और गलत खान-पान जिम्मेदार हैं लेकिन लोग हैं कि मानते नहीं. इसका नतीजा यह है कि आज दुनिया भर में 42.2 करोड़ लोग टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक हर साल करीब 15 लाख लोगों की मौत के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डायबिटीज जिम्मेदार है. डायबिटीज क्रोनिक बीमारी है जिसमें लोगों को इसके साथ जीना पड़ता है. भोजन के बाद खून में ब्लड शुगर का स्तर यदि 180 mg/dl तक हो तो इसे सामान्य माना जाता है लेकिन डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर का लेवल कभी-कभी 300 या 400 के पार भी चला जाता है. यह एक खतरनाक स्थिति है और इसमें मरीज को तत्काल डॉक्टर के पास जाना अनिवार्य है.

कब हो जाता है लाइफ थ्रेटनिंग
मैक्स हेल्थकेयर गुड़गांव में कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजी एंड डायबिटीज के एक्सपर्ट डॉ पारस अग्रवाल बताते हैं कि जब खून में शुगर लेवल बहुत ज्यादा बढ़ता है तब शरीर में कीटोएसिडोसिस (ketoacidosis) का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है. यह डायबिटीज से संबंधित बेहद गंभीर जटिलताएं हैं जिसमें खून में एसिड यानी कीटोन का निर्माण बढ़ने लगता है. ऐसा इंसुलिन की कमी की वजह से होता है. अगर इस स्थिति में पीएच लेवल भी कम हो जाए तो यह लाइफ थ्रेटनिंग भी हो सकता है. इससे किडनी, हार्ट और आंखों पर गंभीर असर पड़ता है. अगर खून में एसिड ज्यादा बन गया है तो आंखों की नसों से खून भी निकल सकता है. हालांकि आंखों से खून बहुत कम ही मामलों में निकलता है. इसमें मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है.

कैसे समझें कि ब्लड शुगर 300 को पार कर गया है How will I feel when my blood sugar is too high
डॉ पारस अग्रवाल कहते हैं कि आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों को पता चल जाता है कि उनका ब्लड शुगर बहुत बढ़ रहा है. वैसे जब ब्लड शुगर लेवल 300 या 400 mg/dl हो जाए तो बहुत ज्यादा प्यास लगती है. इसमें बार-बार पेशाब लगता है. इसके अलावा बहुत अधिक कमजोरी, बेचैनी, देखने में दिक्कत, कंफ्यूजन, पेट में दर्द, सांसों से फ्रूट जैसा स्मेल जैसी शिकायतें बढ़ने लगती है. इस स्थिति में अस्पताल में डॉक्टर मरीज को इंसुलिन थेरेपी देते हैं और शरीर में जमा हुए हानिकाकर फ्लूड और इलेक्ट्रोलाइट्स को बदल देते हैं.

कब हो जाता है घातक
डॉ पारस अग्रवाल ने बताया कि ब्लड शुगर 300 से उपर जाना अपने आप में घातक है. टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में यह स्थिति और ज्यादा घातक है क्योंकि उनमें पहले से ही इंसुलिन नहीं बनता. इस कारण खून में जितने भी ग्लूकोज है वह हानिकारक एसिड में बदलने लगता है जो ज्यादा घातक लीवरेज खतरनाक क्यों है होता है. इससे हार्ट और नसों पर बुरा असर पड़ता है. अगर ब्लड शुगर 400 से उपर चला जाए तो रिस्क और ज्यादा बढ़ जाता है.

इसका इलाज क्या है How can I treat hyperglycemia
डॉ पारस अग्रवाल कहते हैं कि सबसे पहले तो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने ही न दें. इसके लिए नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करें. जैसे ही ब्लड 300 के पार हो, तुरंत डॉक्टर के पास आए. इस स्थिति में मरीज को भर्ती करना पड़ता है. इसमें 3 से 10 दिन तक का समय लग सकता है. करीब एक सप्ताह तक डॉक्टरों की निगरानी में मरीज को रहना पड़ता है. इसमें ड्रिप से इंसुलिन दिया जाता है. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना पड़ता है. अगर मरीज युवा है तो जल्दी रिकवर करेगा. बुजुर्ग मरीज को रिकवर होने में ज्यादा समय लग सकता है.

खुद से क्या करें
अगर ब्लड शुगर लेवल 300 से ज्यादा है तो बहुत अधिक मात्रा में पानी पीएं. पानी शुगर फ्री होना चाहिए. जितना अधिक पानी पीएंगे खून से शुगर की उतनी मात्रा बाहर आएगी. यह पता लगाएं कि शुगर बढ़ी क्यों है. अगर खाने-पीने की वजह से बढ़ी है तो तुरंत किसी भी तरह की मीठी, तली, भूनी चीजों को छोड़ दें. 300 से ज्यादा ब्लड शुगर होने पर किसी भी प्रकार की मीठी चीजें न खाएं. अगर दवाई लेनी भूल गए तो दवाई लें. अगर कोई इंफेक्शन है या बहुत अधिक तनाव है तो उसे दूर करें.

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पानी में बढ़ा अमोनिया का स्तर, जानें सेहत के लिए कितना खतरनाक

लीवर के लिए बेहद खतरनाक है अमोनिया का पानी

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मुताबिक पीने के पानी में अमोनिया की मात्रा 0.5 पीपीएम से ज्यादा नहीं होनी जबकि फिलहाल इसका स्तर पानी में काफी ज्यादा है। ऐसे में लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। पानी में अमोनिया का स्तर बढ़ने से फिर से लोगों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। इस वजह से प्रदेश में पानी की किल्लत की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। इस बीच दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से अपील की गई है कि पानी को पीने और खाने में इस्तेमाल ना करें क्योंकि इसमें अमोनिया की मात्रा ज्यादा है जो शरीर के लिए हानिकारक है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मुताबिक पीने के पानी में अमोनिया की मात्रा 0.5 पीपीएम से ज्यादा नहीं होनी जबकि फिलहाल इसका स्तर पानी में काफी ज्यादा है। ऐसे में लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

वैज्ञानिक औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक शेखर मांडे का कहना है कि पानी में अमोनिया के स्तर के बढ़ने का मुख्य कारण औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट हो सकते हैं। सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र अमोनिया को पानी से निकालने में बहुत अधिक प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।

क्या है अमोनिया और इसके दुष्प्रभाव

अमोनिया एक कलरलेस गैस है जिसका इस्तेमाल उर्वरक, प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, रंजक और अन्य उत्पादों के उत्पादन में एक औद्योगिक रसायन के रूप में किया जाता है। जैविक अपशिष्ट पदार्थ के टूटने से अमोनिया पर्यावरण में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होता है। यह औद्योगिक अपशिष्टों के जरिए या मल द्वारा संदूषण के माध्यम से जमीन या जल स्रोतों के के द्वारा लोगों तक पहुंच सकता है।

यदि पानी में अमोनिया की मात्रा 1 पीपीएम से ऊपर है तो यह मछलियों के लिए खतरनाक होती है वहीं यदि मनुष्य 1 पीपीएम या इससे ज्यादा के अमोनिया स्तर वाले पानी का लंबे समय तक उपयोग करते हैं तो उनके शरीर में इससे कई समस्याएं हो सकती हैं। इसका सबसे ज्यादा लीवर पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा पीलिया, हेपेटाइटिस समेत कई बीमारियां भी हो सकती हैं। इससे कोमा में जाने का खतरा भी काफी ज्यादा होता है। पानी में अमोनिया का स्तर 0.5 पीपीएम से ज्यादा होने पर डीहाइड्रेशन और लीवर इंफेक्शन जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इन सब से बचने के लिए पानी को उबालकर पीना चाहिए।

यमुना में क्यों बढ़ रहा अमोनिया का स्तर

यमुना नदी में अमोनिया का स्तर बढ़ने के लिए हरियाणा के पानीपत और सोनीपत जिलों में डाई लीवरेज खतरनाक क्यों है यूनिट, डिस्टिलरी और अन्य फैक्ट्रियों को संभावित स्रोत माना जाता है। इसके अलावा नदी के इस खंड में कुछ ऐसी कॉलोनियों से सीवेज का पानी भी जाता है, जहां सीवेज की व्यवस्था नहीं है।

ब्लड शुगर का कम होना क्यों है खतरनाक, ये संकेत देते हैं वार्निंग

ब्लड शुगर का बढ़ना जितना सेहत के लिए नुकसानदायक है, इसका कम होना भी उतना ही या कई बार उससे ज्यादा नुकसानदायक है। यह बात सिर्फ डायबिटीज के मरीजों पर नहीं, बल्कि हर स्वस्थ्य इन्सान पर लागू होती है।.

 ब्लड शुगर का कम होना क्यों है खतरनाक, ये संकेत देते हैं वार्निंग

Pratima Thu, 19 Dec 2019 12:28 PM

ब्लड शुगर का बढ़ना जितना सेहत के लिए नुकसानदायक है, इसका कम होना भी उतना ही या कई बार उससे ज्यादा नुकसानदायक है। यह बात सिर्फ डायबिटीज के मरीजों पर नहीं, बल्कि हर स्वस्थ्य इन्सान पर लागू होती है। दरअसल, ब्लड शुगर हमारे शरीर में एनर्जी का स्रोत है। इसी के माध्यम से ग्लुकोज शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचता है। ब्लड शुगर कम होने की स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। यह कई बीमारियों का लीवरेज खतरनाक क्यों है कारण बन सकता है और कई अंगों पर असर डालता है। जैसे - किडनी, लिवर, हार्ट। इसके कारण हेपेटाइटिस हो सकता है, इन्सान कमजोरी महसूस कर सकता है, उसे बेचैनी रह सकती है और बार-बार चक्कर आ सकते हैं।
www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. अनुराग शाही के अनुसार, हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार मरीज के लिए तत्काल इलाज यह है कि उसे शरीर में शुगर बढ़ाने वाली चीजें खिलाई जाएं। इसका सही स्तर लगभग 70 से 110 मिली ग्राम डेसीलीटर होता है।

ब्लड शुगर कम होने के संकेत
थकान महसूस होना
घबराहट
हाथ-पैर कांपना
पसीना आना
भूख लगना
नींद के दौरान रोना
चिड़चिड़ापन
हमेशा चिंता में रहना
धुंधला दिखाई देना
बेहोश होना
किसी बात को नहीं समझ पाना


इसलिए बहुत खतरनाक है ब्लड शुगर
ब्लड शुगर कमी के कारण हाइपोग्लाइसीमिया का दौरा कभी भी पड़ सकता है। हाइपोग्लाइसीमिया अटैक के कारण मरीज वाहन चलाते समय सड़क पर गिर सकता है। या सीढ़िया चढ़ते समय गिर सकता है। जो लोग अकेले रहते हैं, उन्हें बेहोशी के कारण हाइपोग्लाइसीमिया अटैक के दौरान तत्काल इलाज नहीं मिल पाना बहुत घातक हो सकता है।


डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए
डायबिटीज वाले मरीज अपनी ब्लड शुगर पर लगातार नजर रखते हैं, इसलिए उनका इलाज तत्काल हो जाता है, लेकिन यदि आप पूरी तरह स्वस्थ्य हैं और बार-बार ऊपर बताए संकेत नजर आ रहे हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर से मिलना चाहिए। कई बार हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि इन्सान पहचान नहीं पाता है। यह घातक स्थिति होती है। बेहतर यही है कि हर 3 महीने या 6 महीने में ब्लड शुगर की जांच करवाते रहें।

क्या है हाइपोग्लाइसीमिया का इलाज
यदि हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बार-बार कम हो रही तो अपने खान-पान में शुगर बढ़ाने वाली चीजों को शामिल करना होगा। डॉ. अनुराग शाही के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट युक्त खादय् पदार्थों का सेवन करें। तत्काल इलाज चाहिए तो चॉकलेट खाएं, फलों का जूस पीएं, ठंडे पेय पदार्थ जैसे कोक और पेप्सी भी तत्काल राहत दिलाते हैं। जिन लोगों में ब्लड शुगर अनियमित रूप से कम हो जाती है, उन्हें ग्लूकोज की टेबलेट और चॉकलेट हमेशा अपने साथ रखना चाहिए।
शुगर का स्रोत चीनी के अलावा भी ढेर सारे पदार्थ हैं। जैसे - बेकरी प्रॉडक्ट, ड्रिंक्स, प्रॉसेस्ड फूड्स। अमेरिकन डायबीटीज असोसिएशन के अनुसार, स्वस्थ पुरुष को एक दिन में 37.5 ग्राम या 9 चम्मच से ज्यादा शुगर नहीं खाना चाहिए। स्वस्थ महिला को एक दिन में 25 ग्राम या 6 चम्मच से ज्यादा शुगर नहीं खाना चाहिए। इसके कम के सेवन पर ब्लड शुगर स्तर कम हो सकता है।
जो लोग एक्सरसाइज करते हैं, उन्हें अपने ब्लड शुगर स्तर पर ध्यान रखने की जरूरत होती है। पहले कुछ ऐसे मामले में भी सोशल मीडिाय में आए हैं, जहां जिम में पसीना बहाते स्वस्थ्य युवा अचानक ब्लड शुगर की कमी के कारण बेहोश होकर गिर पड़े। गलत खान-पान से परहेज करें और नशे से दूर रहें।

Blood Sugar Level: ब्लड शुगर का ये लेवल दे सकता है मौत, जान लें बचने के उपाय

Blood Sugar Chart: ब्लड शुगर बढ़ने या कम होने वाली स्थिति खतरनाक है. अगर ब्लड शुगर कम है तो पेशेंट की मौत तक हो सकती है. आइए आपको बताते हैं कि ब्लड शुगर का कौन सा लेवल डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक होता है और आप इसे कैसे मैनेज कर सकते हैं.

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Blood Sugar Level: ब्लड शुगर का ये लेवल दे सकता है मौत, जान लें बचने के उपाय

Blood Sugar Range: डायबिटीज अब दुनिया ही नहीं भारत में भी आम बीमारी बन गई है. तेजी से फैलती इस बीमारी की जद में बुजुर्ग ही नहीं बच्चे भी आ रहे हैं. डायबिटीज से जूझ रहा शख्स ही जानता है कि इसे मैनेज करने में कितनी मुश्किलें आती हैं. दरअसल इस बीमारी में बॉडी का ब्लड शुगर यानी खून में ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से ऊपर पहुंच जाती है. अगर ब्लड शुगर लगातार ज्यादा बना हुआ है तो शख्स को गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ता है. ब्लड शुगर बढ़ने या कम होने वाली स्थिति खतरनाक है. अगर ब्लड शुगर कम है तो पेशेंट की मौत तक हो सकती है. आइए आपको बताते हैं कि ब्लड शुगर का कौन सा लेवल डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक होता है और आप इसे कैसे मैनेज कर सकते हैं.

क्या खतरा होता है

ज्यादा ब्लड शुगर का मतलब है शरीर में इंसुलिन की कमी. इसका मतलब है कि आपको खाने में पर्याप्त इंसुलिन नहीं मिल रहा. कसरत कम हो रही है. तनाव, हार्मोनल चेंज और नींद की कमी भी इसका हिस्सा है.

क्या हैं लक्षण

अगर ब्लड शुगर बहुत ज्यादा नहीं है तो थकान, मांसपेशियों में दर्द, नजर का धुंधलाना, बहुत ज्यादा प्यास लगना जैसे लक्षण होते हैं. हाई ब्लड शुगर वालों में ज्यादा थकान, मांसपेशियों में तेज दर्द, वजन कम होना, मुंह सूखना, उल्टी आना और जी मिचलाना शामिल है.

लो ब्लड शुगर क्या है?

इसको हाइपोग्लाइसीमिया भी कहते हैं. अगर शरीर में ब्लड शुगर का लेवल 80mg/dL है तो यह लो ब्लड शुगर माना जाएगा. 40mg/dL से कम होने पर स्थिति बेहद खतरनाक होती है. अगर कई घंटों तक लेवल 40mg/dL के नीचे रहता है तो शख्स कोमा में जा सकता है.

इसके लक्षण क्या हैं?

चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, बोलने में तकलीफ, मांसपेशियों में कमजोरी, भ्रम, गुस्सा और पसीना आना.

Cholesterol Level: उम्र के हिसाब से कितना होना चाहिए कोलेस्ट्रॉल लेवल और कब करानी चाहिए इसकी जांच? जानिए

आपको कितनी बार कोलेस्‍ट्रॉल लेवल (Cholesterol Level) चेक कराना च‍ाहिए यह आपकी उम्र, आपकी मेडिकल हिस्‍ट्री और आपकी फैमिली हिस्‍ट्री पर निर्भर करता है।

Written by Rashmi Upadhyay | Published : January 29, 2021 5:45 PM IST

कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) एक चिपचिपा लिक्विड होता है जो हमारे ब्‍लड में होता है। यह ब्‍लड प्‍लाजमा के द्वारा ट्रांसपोर्ट होता है। हमारे शरीर में 2 तरह का कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) होता है। पहला लो डेंसिटी लिपोप्रोटींस यानी HDL इसे गुड कोलेस्‍ट्रॉल (Good Cholesterol) भी कहते हैं और दूसरा होता है बैड कोलेस्ट्रॉल (Bad Cholesterol), जिसे खराब कोलेस्‍ट्रॉल भी कहते हैं। जो बैड कोलेस्ट्रॉल होता है वह आर्टरिज़ में जमा हो सकता है, जिससे कई खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अक्‍सर लोगों को यह नहीं पता होता कि उनका कोलेस्‍ट्रॉल लेवल कितना चाहिए और उन्‍हें कितने समय बाद चेक कराते रहना चाहिए। तो आइए जानते हैं विस्‍तार से-

19 या उससे कम उम्र के लोगों का Cholesterol Level

कुल कोलेस्ट्रॉल- 170 mg/dL से कम

Non-HDL- 120 mg/dL से कम

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LDL- 100 mg/dL से कम

HDL- 45 mg/dL से ज्‍यादा

20 या उससे ज्‍यादा की उम्र के पुरुषों का Cholesterol Level

कुल कोलेस्‍ट्रॉल- 125 to 200 mg/dL

Non-HDL- 130 mg/dL से कम

LDL- 100 mg/dL से कम

HDL- 40 mg/dL या इससे ज्‍यादा

20 या उससे ज्‍यादा की उम्र की महिलाओं का Cholesterol Level

कुल कोलेस्‍ट्रॉल- 125 to 200 mg/dL

Non-HDL- 130 mg/dL से कम

LDL- 100 mg/dL से कम

HDL- 50 mg/dL या इससे ज्‍यादा

Cholesterol

कितनी बार चेक कराना चाहिए कोलेस्‍ट्रॉल लेवल (Cholesterol Level)?

आपको कितनी बार कोलेस्‍ट्रॉल लेवल (Cholesterol Level) चेक कराना च‍ाहिए यह आपकी उम्र, आपकी मेडिकल हिस्‍ट्री और आपकी फैमिली हिस्‍ट्री पर निर्भर करता है। यदि किसी व्‍यक्ति को स्‍ट्रोक, डायबिटीज और हाई कोलेस्‍ट्रॉल जैसी समस्‍या होती है तो उन्‍हें हर 6 महीने या सालभर में एक बार अपना कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक कराना चाहिए। आइए जानते हैं उम्र के हिसाब से आपको कब और कितनी बार अपना कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक कराना चाहिए।

1. 19 या उससे कम उम्र के लोगों को अपना पहला कोलेस्‍ट्रॉल टेस्‍ट 9 से 11 साल की उम्र में कराना चाहिए। उसके बाद हर 5 साल में एक बार टेस्‍ट कराएं। जिन बच्‍चों के परिवार में रोग से संबंधित कोई हिस्‍ट्री होती है उनका पहली बार कोलेस्‍ट्रॉल लेवल टेस्‍ट 2 साल की उम्र में हो जाना चाहिए।

2. 20 से 44 साल की उम्र के लोगों को हर 5 साल में एक बार अपना कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक कराना चाहिए। 45 से 54 साल की उम्र की महिलाओं को हर 5 साल में एक बार अपना कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक कराना चाहिए। 45 से 65 साल की उम्र के पुरुषों को हर 1-2 साल में अपना कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक कराना चाहिए। जबकि 55-65 साल की उम्र की महिलाओं को हर 1-2 साल में अपना कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक कराना चाहिए।

Maintain healthy cholesterol

कैसे चेक करें कोलेस्‍ट्रॉल लेवल (Cholesterol Level)

अगर आप अपना कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक करना चाहते हैं तो आप घर पर किट लाकर खुद चेक कर सकते हैं। आजकल मार्किट में कई तरह की किट मिलती हैं जिनसे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक हो जाता है। लेकिन अगर आपको नहीं पता कि इसे कैसे चेक करते हैं तो आप डॉक्‍टर से संकर्प करें। डॉक्‍टर आपको इस बारे में सही जानकारी दे देंगे।

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