क्या होता है Short Term Capital Gain ?

Budget 2023-24: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को सरल बनाने के लिए बजट में वित्त मंत्री कर सकती हैं बड़ा एलान!

Budget 2023: बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को युक्तिसंगत बनाने के साथ इंडेक्सेशन का फायदा देने के लिए बेस ईयर में भी बदलाव संभव है.

By: ABP Live | Updated at : 25 Nov 2022 07:49 PM (IST)

प्रतिकात्मक फोटो ( Image Source : Getty )

Budget 2023-24: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट एक फरवरी 2023 को पेश होने वाला है. माना जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में बदलाव को लेकर बड़ा एलान कर सकती हैं. बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को युक्तिसंगत बनाने पर जोर दिया जा सकता है साथ ही इंडेक्सेशन का फायदा देने के लिए बेस ईयर में भी बदलाव संभव है.

इक्विटी निवेशकों पर 12 महीने की होल्डिंग पीरियड के बाद कैपिटल गेन पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. एक साल से कम अवधि के कैपिटल गेन पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स का नियम लागू होता है. अगर प्रापर्टी बेचा जाता है या फिर अनलिस्टेड शेयर को बेचने पर 2 साल के बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. ज्वैलरी और डेट फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स के लिए 3 साल बाद 20 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का नियम लागू होता है. माना जा रहा है कि बजट में कैपिटल गेन टैक्स को एसेट के होल्डिंग पीरियड और टैक्स रेट दोनों को युक्तिसंगत बनाया जा सकता है.

इंडेक्सेशन कैलकुलेशन के लिए बेस ईयर में भी बदलाव किए जाने के आसार हैं. इससे पहले 2017 में बेस ईयर में बदलाव किया गया था. अभी इंडेक्सेशन का बेनिफिट साल 2001 के आधार पर तय किया जाता है. बीते कुछ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन सालों में सभी एसेट के वैल्यूशन में बड़ी बढ़ोतरी हुई है,इसके चलते इंडेक्सेशन के बेस ईयर को बदलने की दरकार आन पड़ी है.

एक अधिकारी के मुताबिक इस पूरे कवायद का मकसद कैपिटल गेन स्ट्रक्चर को सरल बनाने के साथ टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाना है जिससे कम्पलॉयंस के बोझ को कम किया जा सके. इससे एक प्रकार के एसेट क्लास में टैक्स रेट्स और होल्डिंग पीरियड में समानता लाने में मदद मिलेगी. इनकम टैक्स कानून के तहत चल और अचल दोनों ही प्रकार के कैपिटल एसेट्स के बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लगाने का प्रावधान है. हालांकि इसमें पर्सनल एसेट जैसे कार, अप्पैरल और फर्णीचर शामिल नहीं है.

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एएमआरजी एंड एसोसिएट के डायरेक्टर ओम राजपुरोहित ने कहा कि 2004 के बाद कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में कई बदलाव किए गए हैं जिसके कारण यह काफी पेचीदा हो गया है. उन्होंने कहा कि ये संभव है कि सरकार असेट क्लास को चल और अचल की कैटिगरी में बांट दे और होल्डिंग पीरियड को सिंगल टाइमलाइन में रखा जाए.

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Published at : 25 Nov 2022 07:49 PM (IST) Tags: long term capital gain tax Short Term Capital Gain Tax budget 2023 Budget 2023-24 LTCG Tax हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

शेयर मार्केट के निवेशकों के लिए बड़ी खबर, कैपिटल गेन टैक्स को बदलने की हो रही तैयारी, बढ़ सकता है Tax का बोझ

सरकार का कहना है अन्य देशों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 25-30 फीसदी के बीच है. अपने देश में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी है.

शेयर मार्केट के निवेशकों के लिए बड़ी खबर, कैपिटल गेन टैक्स को बदलने की हो रही तैयारी, बढ़ सकता है Tax का बोझ

कैपिटल गेन टैक्स (Capital gain tax) में बदलाव को लेकर मीडिया में चल रही खबरों का वित्त मंत्रालय (Finance ministry) ने खंडन किया है. वित्त मंत्रालय ने कहा कि फिलहाल कैपिटल गेन टैक्स के स्ट्रक्चर में किसी तरह के बदलाव की योजना नहीं है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव की तैयारी चल रही है. यह पूरी तरह आधार विहीन है. मिंट में छपी रिपोर्ट में कहा गया था कि अगले बजट में सरकार रेवेन्यू कलेक्शन (Revenue collections) को बढ़ाने के लिए कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव कर सकती है. इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय विचार कर रहा है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयर बाजार से कमाई पैसिव इनकम की तरह है. ऐसे में शेयर बाजार की कमाई पर लगने वाला टैक्स रेट बिजनेस इनकम पर लगने वाले टैक्स के मुकाबले कम नहीं होना चाहिए. बिजनेस इनकम में कई रिस्क जुड़े होते हैं, साथ में यह रोजगार का अवसर भी देता है. इसके अलावा सरकार कई वेलफेयर स्कीम के बारे में विचार कर रही है जिसके कारण एडिशनल रेवेन्यू जेनरेट करने की जरूरत है.

There is no move to revamp the capital gains tax structure as of now, as alleged in some media reports. Any such reports are in the realm of speculation: Finance Ministry sources pic.twitter.com/b8eCw0wzdd

— ANI (@ANI) March 15, 2022

सूत्र ने बताया कि कैपिटल गेन टैक्स में किसी तरह का बदलाव लाने के लिए सरकार को कानून में बदलाव करना होगा. इसके लिए बजट सेशन सबसे उपयुक्त समय है. तब तक वित्त मंत्रालय इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार भी करेगा. कैपिटल गेन टैक्स की बात करें तो यह दो तरह का होता है. पहला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (Long Term Capital Gain Tax) और दूसरा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (Short Term Capital Gain Tax).

1 साल से ज्यादा होल्डिंग पर लगता है LTCG

अपने देश में अगर शेयर बाजार में 1 साल से ज्यादा के लिए निवेश करते हैं तो निवेश करने पर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के दायरे में आता है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी है. 1 लाख तक लॉन्ग टर्म गेन टैक्स फ्री है. यह नियम 1 अप्रैल 2019 से लागू है. 12 महीने से कम समय के लिए निवेश करने पर यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहलाता है. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 15 फीसदी होता है. इस तरह होल्डिंग पीरियड के आधार पर कैपिटल गेन पर टैक्स लगता है.

जानिए रेवेन्यू सेक्रेटरी ने क्या कहा था

बजट 2022 पेश करने के बाद 9 फरवरी को इंडस्ट्री के लोगों से बात करते हुए रेवेन्यू सेक्रेटरी तरुण बजाज ने कहा था कि अपने देश में कैपिटल गेन टैक्स का स्ट्रक्चर बहुत पेचीदा है. इसपर विचार करने की जरूरत है. 28 फरवरी को उन्होंने फिर से कहा था कि शेयर बाजार से 80 फीसदी कैपिटल गेन पाने वाले लोगों की सालाना इनकम 50 लाख से ज्यादा है.

अन्य देशों में कैपिटल गेन टैक्स 30 फीसदी तक

सरकार का कहना है अन्य देशों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 25-30 फीसदी के बीच है. अगर सरकार कैपिटल गेन टैक्स को बढ़ाती है तो निवेशकों के सेंटिमेंट पर बुरा असर होगा. ऐसे में बड़े निवेशक रियल एस्टेट की तरफ शिफ्ट कर सकते हैं.

Budget 2022 Easy Hai: सिर्फ 1 मिनट में समझिए शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म. क्या होता है कैपिटल गेन टैक्स?

Budget 2022 Easy Hai: कैपिटल गेन टैक्स दो तरह का होता है, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म. इन पर टैक्स की दर भी अलग-अलग होती है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में स्टॉक मार्केट को सरकार ने पिछले साल ही शामिल किया था.

Budget 2022 Easy Hai: जो लोग ज्यादा पैसा कमाते हैं, सरकार उनसे टैक्स भी ज्यादा लेती है. इक्विटी, इक्विटी म्युचुअल फंड (equity mutual fund) में वे ही लोग पैसा लगाते हैं जिनकी कमाई बहुत है और तमाम खर्चे करने के बाद अच्छी बचत हो जाती है. ऐसे में सरकार इस तरह के निवेश से होने वाली कमाई पर भी टैक्स लेती है. इस टैक्स को कैपिटल गेन टैक्स (Capital gain tax) कहते हैं. कैपिटल गेन टैक्स दो तरह का होता है, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म. इन पर टैक्स की दर भी अलग-अलग होती है.

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स

अगर आपने कोई शेयर खरीदा या फिर किसी म्युचुअल फंड में पैसा लगाया और उसे एक साल के भीतर ही उसे बेच दिया तो उससे होने वाली कमाई पर लगेगा 15 फीसदी टैक्स. चाहे आपका टैक्स स्लैब कोई भी हो. चाहे आप जीरो टैक्स में आते हों या फिर 30 फीसदी टैक्स वाले स्लैब में आते हैं, आपको शेयर या म्युचुअल फंड से होने वाली कमाई पर 15 फीसदी टैक्स देना होगा.

क्या होता है Short Term Capital Gain ?

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स

पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल टैक्स बहुत ही आसान था. इसमें अगर आपने 1 साल तक कुछ नहीं बेचा तो कुछ भी टैक्स नहीं लगेगा. लेकिन 2018 से सरकार ने इसमें कुछ बदलाव किए हैं. इसमें अब सरकार ने स्टॉक मार्केट से होने वाली कमाई को भी शामिल कर लिया है.

शेयर मार्केट से पहले सरकार घर, संपत्ति, जेवर, कार, बैंक एफडी, एनपीएस और बॉन्ड आदि की बिक्री से हासिल हुए मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्‍स वसूलती रही है. अब अगर पहली साल 1 लाख रुपए मुनाफा कमाया है तो कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन 1 लाख रुपए से अधिक के मुनाफे पर 10 फीसदी टैक्स देना होगा.

लंबी अवधि में किसी भी चल या अचल संपत्ति पर मिलने वाले प्रॉफिट पर लगने वाले टैक्‍स को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स कहा जाता है. यह देश में पहले से ही मौजूद रहा है. 2018 से यह पहली बार स्‍टॉक मार्केट पर लगा है. इससे पहले यह प्रॉपर्टी समेत कई चीजों पर लगता रहा है. अलग-अलग सेगमेंट के हिसाब से लॉन्‍ग टर्म का कैलकुलेशन अलग-अलग होता है.

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2018 के बजट में सरकार ने किया बदलाव

1 फरवरी को बजट में लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्‍स पर सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं. स्‍टॉक मार्केट से 1 साल की अवधि से ज्‍यादा वक्‍त में हुई 1 लाख रुपए से ज्‍यादा की कमाई पर सरकार 10 फीसदी के रेट से लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स वसूलेगी. इसके बाद अब शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड, दोनों से कमाई होने पर आपको 10 फीसदी का टैक्‍स देना होगा.

कैपिटल गेन पर तो टैक्स लगता है, कैपिटल लॉस का क्या करना है, जानिए Tax बचाने में कैसे मिलती है मदद?

इनकम टैक्स नियम के मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है. शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के अलावा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ भी सेट-ऑफ किया जा सकता है.

यह मौसम टैक्सपेयर्स (Taxpayers) का है. 31 मार्च को चालू वित्त वर्ष खत्म हो रहा है. ऐसे में टैक्सपेयर्स इनकम के साथ-साथ लॉस का भी खयाल रख रहे हैं. जैसा कि हम जानते हैं कैपिटल गेन पर टैक्स (Capital gain tax) लगता है. उसी तरह कैपिटल लॉस (Capital Losses)होने पर राहत भी मिलती है. अगर आपके पोर्टफोलियो में कोई इन्वेस्टमेंट कैपिटल लॉस दे रहा है तो उसका फायदा जरूर उठाएं. इससे आपको टैक्स में राहत मिलेगी.

यह मौसम टैक्सपेयर्स (Taxpayers) का है. 31 मार्च को चालू वित्त वर्ष खत्म हो रहा है. ऐसे में टैक्सपेयर्स इनकम के साथ-साथ लॉस का भी खयाल रख रहे हैं. जैसा कि हम जानते हैं कैपिटल गेन पर टैक्स (Capital gain tax) लगता है. उसी तरह कैपिटल लॉस (Capital Losses)होने पर राहत भी मिलती है. अगर आपके पोर्टफोलियो में कोई इन्वेस्टमेंट कैपिटल लॉस दे रहा है तो उसका फायदा जरूर उठाएं. इससे आपको टैक्स में राहत मिलेगी.

जब किसी असेट या इक्विटी को ज्यादा में खरीदते हैं और कम में बेचते हैं तो यह कैपिटल लॉस कहलाता है. इनकम टैक्स एक्ट के तहत कैपिटल गेन पर टैक्स लगता है और कैपिटल लॉस पर राहत मिलती है. कैपिटल लॉस की बात करें तो इसका फायदा केवल कैपिटल गेन के साथ उठाया जा सकता है. मतलब, कैपिटल लॉस को कैपिटल गेन के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है.

जब किसी असेट या इक्विटी को ज्यादा में खरीदते हैं और कम में बेचते हैं तो यह कैपिटल लॉस कहलाता है. इनकम टैक्स एक्ट के तहत कैपिटल गेन पर टैक्स लगता है और कैपिटल लॉस पर राहत मिलती है. कैपिटल लॉस की बात करें तो इसका फायदा केवल कैपिटल गेन के साथ उठाया जा सकता है. मतलब, कैपिटल लॉस को कैपिटल गेन के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है.

इनकम टैक्स नियम के मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है. शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के अलावा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ भी सेट-ऑफ किया जा सकता है. अगर पूरा कैपिटल लॉस, एक वित्त वर्ष में कैपिटल गेन के साथ सेट-ऑफ नहीं हो पाता है तो इस नुकसान की भरपाई अगले आठ सालों तक की जा सकती है.

इनकम टैक्स नियम के मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है. शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के अलावा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ भी सेट-ऑफ किया जा सकता है. अगर पूरा कैपिटल लॉस, एक वित्त वर्ष में कैपिटल गेन के साथ सेट-ऑफ नहीं हो पाता है तो इस नुकसान की भरपाई अगले आठ सालों तक की जा सकती है.

कैपिटल गेन और कैपिटल लॉस दो तरह का होता है. अगर आप सीधा शेयर बाजार या इक्विटी रिलेटेड इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं तो 12 महीने से पहले रिडीम करने पर यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन या कैपिटल लॉस के अंतर्गत आता है. 12 महीने के बाद रिडीम करने पर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन या कैपिटल लॉस के अंतर्गत आता है.

कैपिटल गेन और कैपिटल लॉस दो तरह का होता है. अगर आप सीधा शेयर बाजार या इक्विटी रिलेटेड इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं तो 12 महीने से पहले रिडीम करने पर यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन या कैपिटल लॉस के अंतर्गत आता है. 12 महीने के बाद रिडीम करने पर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन या कैपिटल लॉस के अंतर्गत आता है.

इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15 फीसदी का टैक्स लगता है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 10 फीसदी का टैक्स लगता है. 1 लाख तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. ऐसे में अगर आपके पोर्टफोलियो में कैपिटल गेन 1 लाख से ज्यादा होता है तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस से सेट-ऑफ कर सकते हैं.

इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15 फीसदी का टैक्स लगता है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 10 फीसदी का टैक्स लगता है. 1 लाख तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. ऐसे में अगर आपके पोर्टफोलियो में कैपिटल गेन 1 लाख से ज्यादा होता है तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस से सेट-ऑफ कर सकते हैं.

सभी शॉर्ट शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टर्म कैपिटल गेन के बारे में

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन

भारतीय कर कानून इस देश में आय अर्जित करने वाले व्यक्ति पर करों का भुगतान करना अनिवार्य बनाते हैं। चल और अचल संपत्तियों, जैसे संपत्तियों को बेचकर अर्जित मुनाफे के लिए भी यही सच है। जबकि किसी की संपत्ति को बेचने से उत्पन्न लाभ को पूंजीगत लाभ के रूप में जाना जाता है, उन्हें कर देयता तय करने के लिए दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।

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